Wednesday, August 31, 2011

सीबीआई, सीवीसी और जन लोकपाल



हमारे देश में सरकार में ढेरों जांच ऐजेंसी बना ली है। सीवीसी, सीबीआई, डिपार्टमेण्टल विजिलेंस, एण्टी करप्शन ब्रांच, स्टेट विजिलेंस हर ऐजेंसी के अन्दर कुछ कमी छोड़ दी गई है, जिससे वो ऐजेंसी बेकार हो गई है और सबसे बड़ी बात ये है कि सारी की सारी ऐजेंसी सरकार के अण्डर में आती है। उन्हीं लोगों के अण्डर में आती है जिन्होंने चोरी कर रखी है, उन्हीं लोगों के अण्डर में आती है भ्रष्टाचार कर रखा है, उन्हीं लोगों के अण्डर में आती है जिनके खिलाफ इन जांच ऐजेंसी को जांच करनी है जो ये सीधी सीधी बात है कि यह जाँच एजेंसी अपना काम नहीं कर पाती। हमारा कहना ये है कि ये सारी जांच ऐजेंसी की हमें कोई जरूरत नहीं है। हमारा देश इनके ऊपर इतना पैसा बर्बाद कर रहा है। इसकी कोई जरूरत नहीं है। इन सारी जांच ऐजेंसियों को केन्द्र स्तर पर विलय करके लोकपाल के अण्डर में लाया जाए और राज्य स्तर विलय करके इनको लोकायुक्त के अण्डर में लाया जाये।

सीबीआई, सीवीसी का जन लोकपाल बिल में विलय
कुछ लोगों का कहना है कि आप सीबीआई, सीवीसी, डिपार्टमेण्टल विजिलेंस इन सारी ऐजेंसिस को एक साथ इसके अन्दर क्यों मर्ज रहे हैं? सीबीआई को रहने दीजिए काम करने दीजिए, सीवीसी को काम करने दीजिए। आप अगर लोकपाल के लिए अलग से अफसरों की तैनाती कर दीजिए।

कुछ लोगों का कहना है सीबीआई इतनी बुरी भी तो नहीं है, सीवीसी आखिर इतनी बुरी भी तो नहीं है। हमें ये सब बातें सुनकर बड़ा आश्चर्य हो रहा है। ये अचानक सीबीआई इतनी अच्छी कब से लगने लगी? एक भी केस सीबीआई ने ऐसा किया हो जो बिना कोर्ट की मॉनिटरिंग के ठीक ठाक किया हो? सीबीआई सीधे-सीधे भ्रष्ट, चोरों और डाकुओं के अण्डर में काम करती है। और हम यह उम्मीद करें की वो चोरों और डाकुओं के खिलाफ एक्शन लेगी। ऐसा कतई नहीं हो सकता। सीबीआई के अन्दर पैसा हम फूंकते रहें, उनके कर्मचारियों को तनख्वाह देते रहें और सीबीआई बैठकर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती रहे क्या हमें ऐसे सीबीआई की जरूरत है? क्या हमें सीवीसी की जरूरत है? क्या हमें ऐसे डिपार्टमेण्टल विजिलेंस की जरूरत है?

एक तरफ तो हम इन ऐजेंसिस को भ्रष्टाचार बढ़ाने के लिए काम करने की छूट दे रहें हैं और दूसरी तरफ ये कहें कि लोकपाल को और कर्मचारी दे दो और नई पोस्ट क्रिएट कर दो। हमें ये लगता है कि ये बेमानी बातें हैं। जो ऐजेंसिस आज काम नहीं कर रहीं हैं उनको बन्द करके उनके सारे कर्मचारियों को काम करने के लिए लोकपाल में डाला जाए। जो कर्मचारी भ्रष्टाचार करे उसे नौकरी से निकाल दिया जाए, जो ठीक से काम न करे उसको काम से निकाल दिया जाए, जो काम करे उनको लोकपाल के अण्डर नियुक्त कर दिया जाए।

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