वर्तमान व्यवस्था | जन लोकपाल-जन लोकायुक्त की प्रस्तावित व्यवस्था | |
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जज | भारत के मुख्य न्यायधीश की अनुमति के बिना सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के किसी जज के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती। ऐसे बहुत कम उदाहरण हैं जब भारत के मुख्य न्यायाधीश ने अपने ही जजों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मंजूरी दी हो। | जन लोकपाल बिल में लोकपाल की पूरी बेंच किसी जज के खिलाफ मामला दर्ज करने के बारे में फैसला करेगी। भारत के मुख्य न्यायाधीश की मंजूरी की कोई जरूरत नहीं होगी। इस तरह न्यायपालिका में व्याप्त भ्रष्टाचार से निपटा जा सकेगा। |
सजा | भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी पाए जाने पर 6 महीने से लेकर 7 साल तक जेल का प्रावधान है, जो पर्याप्त नहीं है। | दोषी पाए जाने पर कम से कम एक साल और अधिक से अधिक सख्त उम्रकैद का प्रावधान होगा। उच्च अधिकारियों एवं नेताओं का कड़ी सज़ा दी जाएगी। |
सुबूत | वर्तमान में यदि कोई व्यक्ति सरकार से अवैध रूप से कोई लाभ प्राप्त करता है, तो यह साबित करना मुश्किल होता है कि उसने रिश्वत दी है। | अगर कोई व्यक्ति नियमों और कानूनों से हटकर सरकार से काई लाभ प्राप्त करता है, तो मान लिया जाएगा कि वह व्यक्ति और सम्बन्धित सरकारी अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। |
भ्रष्टाचार उजागर करने वालों की सुरक्षा | वर्तमान में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों को डराया-धमकाया और यहां तक कि मार भी दिया जाता है। इन्हें किसी तरह की सुरक्षा नहीं मिलती। | जन लोकपाल और जन लोकायुक्त ऐसे लोगों की सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार होंगे। |
कई तरह की भ्रष्टाचार निरोधी एजेन्सीयां | वर्तमान में कई तरह की भ्रष्टाचार एजेन्सीयां है जैसे-सीबीआई, सीवीसी, एसीबी और राज्य सतर्कता विभाग। ये सभी भ्रष्ट अफसरों और नेताओं के कहे अनुसार काम करती हैं और उन्हें संरक्षण प्रदान करती हैं। इनका कोई फायदा नहीं है। | केन्द्र सरकार के सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधी शाखा, सीबीसी और अन्य सभी विभागीय सतर्कता इकाईयों को जन लोकपाल में मिला दिया जायेगा।
राज्य स्तर पर काम कर रही पुलिस की भ्रष्टाचार निरोधी शाखा, राज्य सतर्कता विभाग और सभी विभागीय सतर्कता इकाईयों के साथ-साथ राज्य में काम कर रहे लोकायुक्त को भी जन लोकायुक्त में मिला दिया जायेगा। |
Wednesday, August 31, 2011
वर्तमान व्यवस्था और जन लोकपाल-जन लोकायुक्त की प्रस्तावित व्यवस्था
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